Tuesday, April 27, 2010

तीन घंटे में ही मिल जाएगी डाक



अब दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के परिजनों को चि_ी के लिए लम्बा इन्तजार नहीं करना होगा। बस उन्हें केवल महज तीन घण्टों में ही अपने रिश्तेदार या परिजन के समाचार मिल जाएंगे। भारतीय डाक विभाग नेे समय के साथ बदलाव करते हुए सभी डाकघरों को भी हाईटैक बनाने की कवायद शुरू की गई और इसी के तहत नागौर पोस्ट आफिस को भी इससे जोड़ दिया गया। हालांकि डाक विभाग की ओर से इस योजना का व्यापक प्रचार प्रसार नहीं हो पाने के कारण शहर के लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। डाक विभाग की ओर से सूचना क्रांति के इस दौर में आमजन को डाक विभाग से जोड़े रखने के लिए नई नई योजनाएं तैयार कर आम जन को जोड़े रखने का प्रयास किया गया लेकिन पर्याप्त प्रचार के अभाव में इनकी संख्या न्यून के बराबर ही है। नकाश गेट स्थित मुख्य डाकघर के डाकपाल ने बताया कि इस योजना के तहत देश में किसी भी स्थान पर संदेश भेजने के लिए केवल १० रुपए का शुल्क लिया जाता है और इसे भी स्टॉम्प लगाकर भेजा जाता है। साथ ही विदेशों में इस सेवा का लाभ लेने पर विभाग की ओर से इस संदेश को स्केन पर प्राप्त कर्ता के मेल एड्रेस पर डाल दिया जाता है। जिससे लोगों को जल्द संदेश प्राप्त हो जाते है।


डाक विभाग की ओर से ई-पोस्ट के तहत उपभोक्ता द्वारा 10 रुपए का शुल्क चुका कर एक ए-4 साईज के पेपर पर संदेश लिखकर डाकघर में दिया जाता है। डाककर्मी द्वारा पेपर को स्केन कर वांछित डाकघर में इंटरनेट से मेल कर दिया जाता है। वहां से उस संदेश के प्रिंट को डाकिया दिए गए पत्ते पर पहुंचा देता है। इस प्रक्रिया में केवल 3 से 4 घंटे का समय लगता है।

विधानसभा अध्यक्ष का दौरा स्थगित


नागौर राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष दीपेंद्रसिंह शेखावत द्वारा राज्यपाल प्रभा राव के निधन पर राजकीय शोक घोषित किए जाने पर उन्होंने २९ अप्रेल से एक मई के दौरान जोधपुर व गोटन जिला नागौर के अपने यात्रा कार्यक्रम को स्थगित कर दिया है

Sunday, April 25, 2010

डीएम नागौर हुऐ पीएम से सम्मानित



प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने नागरिक सेवा दिवस के अवसर पर बुधवार को विज्ञान भवन में नागौर कलेक्टर डॉ. समित शर्मा को उत्कृष्ट प्रशासनिक सेवाओं के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार से सम्मानित किया। शर्मा को पदक, स्क्रोल एवं एक लाख रुपए की नकद राशि पुरस्कार के रूप में प्रदान की। सस्ती व उच्च गुणवत्ता वाली जैनरिक दवाइयां आमजन तक सुलभ कराने के किए गए उल्लेखनीय प्रयासों को देखते शर्मा को इस पुरस्कार से नवाजा गया है। इस मौके पर शर्मा ने प्रधानमंत्री के समक्ष एक पॉवर प्वाइंट प्रजेंटेशन भी दिया जिसमें उन्होंने आमजन तक कम कीमत व उच्च गुणवत्ता युक्त जैनरिक दवाइयां सहज सुलभ करवाने


के क्षेत्र में किए गए प्रयासों पर रोशनी डाली। उल्लेखनीय है कि भारतीय प्रशासनिक सेवा के 2004 बैच के अधिकारी डॉ. समित शर्मा ने प्रदेश में जैनरिक दवाइयों का सफर झालावाड़ में सहायक कलक्टर पद पर रहते हुए शुरू किया। उन्होंने जोधपुर में उपखण्ड मजिस्टे्रट व अलवर, चित्तौडग़ढ़ तथा नागौर में जिला कलक्टर के पद पर रहते हुए अब तक कुल 105 दवा स्टोर्स के माध्यम से आमजन को सस्ती जैनरिक दवाइयां उपलब्ध करवाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है जिसके कारण हजारों गरीब व्यक्तियों की जाने बच पाई हैं।

डॉ.ं समित शर्मा ने बताया कि अत्यन्त गरीब होने से कई लोग अपने मकान, दुकान, पशुधन, गहने आदि गिरवी रख कर भी समुचित इलाज नहीं करवा पाते हैं और दवाओं के अभाव में काल ग्रसित हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में कम कीमत पर उपलब्ध जैनरिक दवाओं का प्रचलन बढऩे से अब गरीब लोग अपने परिजनों का इलाज करवा पा रहे हैं।

डॉ. शर्मा द्वारा नागौर जिले में मात्र 6 माह की अल्प अवधि में 8 नये जैनरिक दवा स्टोर खुलवाकर तथा वर्तमान में कुल 15 संचालित जैनरिक दवा स्टोर्स के माध्यम से 77 लाख रूपये की जैनरिक दवाइयां विक्रय कर 3 लाख 15 हजार से अधिक रोगियों को अनुमानित 3.31 करोड़ रुपये की बचत करवाई।



सी प्रकार चितौडग़ढ़ में भी 17 माह की अवधि में जैनरिक दवाईयां खरीदने से 11.56 करोड़ रुपये की राशि की बचत हुई।


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